नो।
इंग्लिश का ये छोटा सा वर्ड हमारे बीच बहुत फेमस है,
और वो इसलिए क्योंकि इसका जो मतलब है,वो अपने आप में एक अलग ही सेंटेंस क्रिएट करता है।
क्योंकि जिनको ये बोला जाता है उनके रियेक्शनस इस वर्ड को सुनने के बाद पूरी तरह से बदल जाते हैं।
इंग्लिश का ये छोटा सा वर्ड हमारे बीच बहुत फेमस है,
और वो इसलिए क्योंकि इसका जो मतलब है,वो अपने आप में एक अलग ही सेंटेंस क्रिएट करता है।
क्योंकि जिनको ये बोला जाता है उनके रियेक्शनस इस वर्ड को सुनने के बाद पूरी तरह से बदल जाते हैं।
और कभी कभी लोगों की सोंच भी।
ये जितना फेमस है उतना ही कॉमन भी और ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका यूज़ लगभग हर कोई हर दिन किसी न किसी वजह से करता ही है ।
ये जितना फेमस है उतना ही कॉमन भी और ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका यूज़ लगभग हर कोई हर दिन किसी न किसी वजह से करता ही है ।
उदाहरण के लिए अगर आप आलसी है तो आपको ये बोलने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी क्योंकि आपसे जब भी कोई काम कहा जायेगा तो आपका एक ही जवाब होगा।
नो।
लेकिन अगर थोड़े बड़े पैमाने पे हम इस वर्ड की खासियत पे रिसर्च करेंगे तो हमारे सामने दो चीजें निकलकर सामने आएंगी,
या यूं कह लें इसके दो मतलब सामने आते है।
नो।
लेकिन अगर थोड़े बड़े पैमाने पे हम इस वर्ड की खासियत पे रिसर्च करेंगे तो हमारे सामने दो चीजें निकलकर सामने आएंगी,
या यूं कह लें इसके दो मतलब सामने आते है।
1-नो मीन्स नहीं ।
2-नो मीन्स नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी।
2-नो मीन्स नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी।
और इसका सबसे ज्यादा इफेक्ट पड़ता है उनपे।
जिनको ये वर्ड बोला जाता है।
जैसे-
जब कोई पहली बार जॉब इंटरव्यू के लिए जाता है तो ज्यादातर ये देखने को मिलता है कि पहली बार में सबका सलेक्शन नही हो पाता ।
मतलब नो।
उन्हें नो सुनने को मिलता है।
अब इसका इफेक्ट लोगों पे दो तरह से पड़ता है जो मैंने अभी बताए है ।
यानी कुछ के लिए तो ये नो मीन्स नहीं यानी अब सब खत्म।
कैसे क्या होगा ।
यार अब दूसरी नौकरी कैसे मिलेगी।
इस कंपनी ने तो मना कर दिया।
जब यहां मेरा सलेक्शन नहीं हुआ तो कहीं और कैसे हो जाएगा ।
पता नहीं अगला इन्टरव्यूवर कैसा होगा ।
यार अब अगले इंटरव्यू के लिए मेरी तैयारी पूरी तरह से हो भी पाएगी या नहीं।
ये थॉट्स कुछ के माइंड में जरूर आते है।
बट कुछ के लिए नो मीन्स नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी।
यानी।
यार वैसे भी ये कंपनी अपने लिए सही नहीं थी।
एच.आर. भी बढ़िया नहीं था सही से इंटरव्यू ही नहीं ले पाया ।
अब तो दुसरीं किसी बड़ी कंपनी में ही मेरा सलेक्शन होगा।
जिनको ये वर्ड बोला जाता है।
जैसे-
जब कोई पहली बार जॉब इंटरव्यू के लिए जाता है तो ज्यादातर ये देखने को मिलता है कि पहली बार में सबका सलेक्शन नही हो पाता ।
मतलब नो।
उन्हें नो सुनने को मिलता है।
अब इसका इफेक्ट लोगों पे दो तरह से पड़ता है जो मैंने अभी बताए है ।
यानी कुछ के लिए तो ये नो मीन्स नहीं यानी अब सब खत्म।
कैसे क्या होगा ।
यार अब दूसरी नौकरी कैसे मिलेगी।
इस कंपनी ने तो मना कर दिया।
जब यहां मेरा सलेक्शन नहीं हुआ तो कहीं और कैसे हो जाएगा ।
पता नहीं अगला इन्टरव्यूवर कैसा होगा ।
यार अब अगले इंटरव्यू के लिए मेरी तैयारी पूरी तरह से हो भी पाएगी या नहीं।
ये थॉट्स कुछ के माइंड में जरूर आते है।
बट कुछ के लिए नो मीन्स नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी।
यानी।
यार वैसे भी ये कंपनी अपने लिए सही नहीं थी।
एच.आर. भी बढ़िया नहीं था सही से इंटरव्यू ही नहीं ले पाया ।
अब तो दुसरीं किसी बड़ी कंपनी में ही मेरा सलेक्शन होगा।
वैसे भी इन छोटी-मोटी कपनियों में काम करके अपना क्या भला होने वाला।
अब तो सीधा बॉम्बे।
या किसी दूसरे बड़े शहर ।
अब तो अपना खुद का स्टार्टअप करेंगे।
उनकी सोंच ये होती है कि अब कुछ नया होगा ।
कुछ अलग देखने को मिलेगा।
कुछ और सीखने को मिलेगा ।
और यही,उनकी सीखने की चाहत उनका एक्सपीरियंस बनता चला जाता है ,जो उनकी लाइफ में हर जगह उनके काम आता है ।
एंड खुद के लिए लगातार ऑपर्चुनिटी ढूंढने वाले को ऑपर्चुनिटी मिल ही जाती है ।
और जिसे ऑपर्चुनिटी मिल गई उसे सफलता तो एक न एक दिन मिल ही जानी है।
क्योंकि जो इंसान अवसरों को बनाना जानता है,
विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अकॉर्डिंग Favorable बनाना जानता है,
एक बेहतरीन प्लांनिग के साथ चलना जानता है,
उसके लिए नो वर्ड कभी भी,
उसका मतलब नहीं लेकर नहीं आता ।
उसके लिए वो हमेशा नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी लेके ही आता है।
और वो ऑपर्चुनिटी उसकी लाइफ बदल देती है ।
उसे वहां पहुंचा देती है जहां पहुंचने के बारे में उसने कभी सोंचा भी नही था।
पर जो लोग ये सोंचते है कि मौके और अवसर किस्मत से मिलते है।
सब ऊपर वाले कि कलम से लिखा हुआ है
उनके लिए मेरे पास केवल एक ही वर्ड है नो।
ये बस उनका भ्रम है ।
और वो उस भ्रम में ही जीना चाहते हैं ।
मजे की बात तो ये है कि ऐसे लोग दूसरों को भी इस बात पे बिलीव करने की सलाह देते है।
तो मेरी आप सभी से रिकुएस्ट है प्लीज ऐसे लोगों से दूर रहिये ।
क्योंकि अगर ऐसा होता तो एक पेपर बेचने वाला कभी भी इंडिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट न बन पाता ।
एक चाय वाला देश का प्राइम मिनिस्टर न बन पाता।
एक गरीब बच्चा जिसके पास इतने पैसे भी न थे कि अपने पढ़ने के लिए एक कॉपी खरीद ले दुनिया का सबसे महान मैथमटिशियन श्रीनिवास रामानुजन न बन पाता।
क्योंकि जिनके हौसले बुलंद होते है उनके लिए किस्मत, और नही ये मुझसे नही होगा जैसे शब्दों के कोई मायने नही होते।
उन्हें लाइफ में जितनी बार भी नो सुनने को मिलता है वो उतनी बार उसे एक नई अपॉर्च्युनिटी के रूप में ले लेते है और आगे बढ़ जाते है।
वो अपनी मेहनत से उस अवसर का इस्तेमाल करते है।
या अगला अवसर बना लेते है।
देखिये ये लाइफ हमे सिर्फ एक बार ही मिलती है।
तो या इस लाइफ को हमे एक बार नो सुनकर उसका नही में मतलब निकालकर चुपचाप बैठ जाना है।
या फिर उसे नेक्स्ट अपॉर्च्युनिटी के रूप में लेकर आगे की तैयारी में लग जाना है ।
ये केवल हमारे ऊपर डिपेंड करता है।
बट जीतते वही है जो इस नो में छुपे हुए अगले अवसर को तलाश कर पाते है। उसे पहचान पाते है ।
और उस अवसर का फायदा उठा कर अपनी लाइफ को बदल कर रख देते है ।
ये याद रखने वाली बात है कि जितने बार भी हमे नो सुनने को मिलता है उतने बार उस नो में अगली अपॉरचुनिटी को पहचान कर उसपे काम करना शुरू कर देना ही एक अच्छे विनर की खासियत होती है।
ऐसा नही है कि जब किसी को नो सुनने को मिलता है तब निराशा नही होती या हमारे अंदर निगेटिविटी नही आती।
बट इन सब के होते हुए भी जो अपने पे कंट्रोल रखते है अपने ब्रेन पे फोकस रखते हैं और सारी निगेटिविटी जो उनके अंदर किसी नो शब्द के रूप में आ जाती है।उसे इग्नोर करके नई ऑपर्चुनिटी के बारे में सोंचके अपने अगले कदम की तैयारी कर देते है वो ही आखरी में,
अब तो सीधा बॉम्बे।
या किसी दूसरे बड़े शहर ।
अब तो अपना खुद का स्टार्टअप करेंगे।
उनकी सोंच ये होती है कि अब कुछ नया होगा ।
कुछ अलग देखने को मिलेगा।
कुछ और सीखने को मिलेगा ।
और यही,उनकी सीखने की चाहत उनका एक्सपीरियंस बनता चला जाता है ,जो उनकी लाइफ में हर जगह उनके काम आता है ।
एंड खुद के लिए लगातार ऑपर्चुनिटी ढूंढने वाले को ऑपर्चुनिटी मिल ही जाती है ।
और जिसे ऑपर्चुनिटी मिल गई उसे सफलता तो एक न एक दिन मिल ही जानी है।
क्योंकि जो इंसान अवसरों को बनाना जानता है,
विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अकॉर्डिंग Favorable बनाना जानता है,
एक बेहतरीन प्लांनिग के साथ चलना जानता है,
उसके लिए नो वर्ड कभी भी,
उसका मतलब नहीं लेकर नहीं आता ।
उसके लिए वो हमेशा नेक्स्ट ऑपर्चुनिटी लेके ही आता है।
और वो ऑपर्चुनिटी उसकी लाइफ बदल देती है ।
उसे वहां पहुंचा देती है जहां पहुंचने के बारे में उसने कभी सोंचा भी नही था।
पर जो लोग ये सोंचते है कि मौके और अवसर किस्मत से मिलते है।
सब ऊपर वाले कि कलम से लिखा हुआ है
उनके लिए मेरे पास केवल एक ही वर्ड है नो।
ये बस उनका भ्रम है ।
और वो उस भ्रम में ही जीना चाहते हैं ।
मजे की बात तो ये है कि ऐसे लोग दूसरों को भी इस बात पे बिलीव करने की सलाह देते है।
तो मेरी आप सभी से रिकुएस्ट है प्लीज ऐसे लोगों से दूर रहिये ।
क्योंकि अगर ऐसा होता तो एक पेपर बेचने वाला कभी भी इंडिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट न बन पाता ।
एक चाय वाला देश का प्राइम मिनिस्टर न बन पाता।
एक गरीब बच्चा जिसके पास इतने पैसे भी न थे कि अपने पढ़ने के लिए एक कॉपी खरीद ले दुनिया का सबसे महान मैथमटिशियन श्रीनिवास रामानुजन न बन पाता।
क्योंकि जिनके हौसले बुलंद होते है उनके लिए किस्मत, और नही ये मुझसे नही होगा जैसे शब्दों के कोई मायने नही होते।
उन्हें लाइफ में जितनी बार भी नो सुनने को मिलता है वो उतनी बार उसे एक नई अपॉर्च्युनिटी के रूप में ले लेते है और आगे बढ़ जाते है।
वो अपनी मेहनत से उस अवसर का इस्तेमाल करते है।
या अगला अवसर बना लेते है।
देखिये ये लाइफ हमे सिर्फ एक बार ही मिलती है।
तो या इस लाइफ को हमे एक बार नो सुनकर उसका नही में मतलब निकालकर चुपचाप बैठ जाना है।
या फिर उसे नेक्स्ट अपॉर्च्युनिटी के रूप में लेकर आगे की तैयारी में लग जाना है ।
ये केवल हमारे ऊपर डिपेंड करता है।
बट जीतते वही है जो इस नो में छुपे हुए अगले अवसर को तलाश कर पाते है। उसे पहचान पाते है ।
और उस अवसर का फायदा उठा कर अपनी लाइफ को बदल कर रख देते है ।
ये याद रखने वाली बात है कि जितने बार भी हमे नो सुनने को मिलता है उतने बार उस नो में अगली अपॉरचुनिटी को पहचान कर उसपे काम करना शुरू कर देना ही एक अच्छे विनर की खासियत होती है।
ऐसा नही है कि जब किसी को नो सुनने को मिलता है तब निराशा नही होती या हमारे अंदर निगेटिविटी नही आती।
बट इन सब के होते हुए भी जो अपने पे कंट्रोल रखते है अपने ब्रेन पे फोकस रखते हैं और सारी निगेटिविटी जो उनके अंदर किसी नो शब्द के रूप में आ जाती है।उसे इग्नोर करके नई ऑपर्चुनिटी के बारे में सोंचके अपने अगले कदम की तैयारी कर देते है वो ही आखरी में,
जीत पाते हैं।।
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