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जरूरी क्या है अच्छा बनना या अच्छा दिखना?

आपके मरने के बाद कोई भी ये याद नहीं रक्खेगा कि ये कपड़े बहुत ब्रांडेड पहनता था।
इसके पास फ़ोन बहुत अच्छा था।
इसकी कार बहुत महंगी थी।
या इसके पास बहुत बड़ा बंगला था ।
इन सब बातों को कोई भी याद नही रक्खेगा।
सिवाय इसके की आपका व्यक्तित्व कैसा था।
ये बात थोड़ी अटपटी जरूर लगती है लेकिन ये सच है।
किसी को कोई मतलब नही है कि आप क्या पहनते है? किससे चलते हैं क्या खाते हैं क्या पीते हैं कितने महंगे घर में रहते हैं किसी को कोई फर्क नही पड़ता।
लोग आपको केवल आपकी पर्सनैलिटी से याद रखते हैं आपके बिहेवियर से याद रखते हैं,आपकी पॉजिटिविटी से याद रखते हैं आपकी सिनसीअर्टी से याद रखते हैं अपने काम के लिए जो आपका डेडिकेशन है उसके लिए याद रखते हैं।
और इसका आपके चहेते ब्रैंड से कोई लेना देना नही है।
लेकिन हम सब कहीं ना कहीं दूसरों का ध्यान अपनी ओर करना चाहते हैं।
इस दुनिया का हर इंसान, यही चाहता है कि सबका ध्यान मेरी तरफ हो। हर कोई कहीं न कहीं मुझसे अट्रैक्ट हो
और हम इसी चक्कर में एक से एक महँगा सामान खरीदते हैं, ज्यादा से ज्यादा पैसा खर्च करते हैं अच्छा दिखने के लिए।
अच्छा बनने के लिए नही। क्योंकि हमें लगता है, की सिर्फ  इससे हम दूसरों को इम्प्रेस कर सकते हैं।
मगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
याद करीये उन महान लोगों को जिनको आप आज भी जानते हैं। और बहुत अच्छी तरह जानते हैं।
क्या उन लोगोंने इस तरह दुनिया को अपने वजूद के बारे में बताया था?
क्या उन्होंने किसी ब्रांड का सहारा लिया अपने आप को अच्छा दिखाने के लिए?
नही।
उन्होंने अपने आप को अच्छा बनाया न कि अच्छा दिखाया। अपने सिम्पल से दिखने वाले लुक में भी उन्होंने वो महान काम किये जो आज की डेट में करना हमारे लिए लगभग इम्पॉसिबल है।
अब आप ही बताइए हमारे लिए क्या ज्यादा जरूरी है
हम अच्छा दिखें या हम अच्छा बने।

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