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क्या सब कुछ दिखावा है?

अब सोंचने का समय नही है।
क्योंकि ये कई मायनों में साबित हो चुका है कि हमारी हर परेशानी की वजह हम खुद हैं ।
और इसमें कोई दो राय नही है कि हमारी हर समस्या को हमने खुद पैदा किया है ।
ये कही बाहर से नही हो रहा। कोई और आकर आपको परेशानी में नही डाल रहा आप खुद ही परेशान हैं वो भी अपने अंदर की मानसिकता के कारण।
बस हम समझ नही पा रहे है।
जीवन के इतने सारे पहलुओं में ये भी एक पहलू है ।
जिसे समझना बहुत जरूरी है क्योंकि आप की सारी परेशानिया आप से है।
या यूं कह लें आप खुद है।
क्योंकि इस पूरी दुनिया में सिवाय इंसान के और कोई ऐसा जीव नही है जो सामाजिक रूप से रहता हो।
कोई नही है।
सिवाय हमारे ।
क्योंकि हम अलग है ।
हम सोंच सकते है,समझ सकते हैं,बोल सकते हैं।
हम अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता का रूप दे सकते है।
और उसी वास्तविकता में जीते हैं लेकिन अगर इसकी ऊपरी परत को हटाकर देखा जाए तो आपको ये समझ आएगा कि आखिरमें सब कुछ कल्पना है।
हमने अपनी लाइफ में जो भी चीज वास्विकता में देखी है वो पहले कल्पना थी।
पहले हमने उसे अपनी कल्पना में देखा। फिर वो अस्तित्व में आई।
हर चीज।
एक सुई से लेकर सैटेलाइट तक सब हमने अपनी कल्पना में देखा ।
ये सब हजारो सालों से चलता चला आ रहा है बस हममे से कुछ लोग ही इसे समझ पाते हैं बाकी सब इसी भूल भुलैया में फसे रह जाते हैं ।
और यहां पे ये बात भी साफ हो जाती है कि हमने अपनी हर परेशानी को भी पहले अपनी खुद की कल्पना में देखा।
और फिर वास्तविकता में।
लेकिन हम हमेशा से इसे नकारते रहे हैं।
हम हर उस चीज को नकार देते हैं जो हमे परेशान करती
है ।
और ये हमेशा परेशान रहने की हमारी सबसे बड़ी वजह है
अब बात ये आती है की ये जो बाहरी दिखावा है इससे आगे जाकर जो वास्तविकता है।
वहां तक हम क्यो  नही सोंच पाते ?
इस वास्तविकता और और कल्पना का अंतर हमे क्यों नही दिखाई देता ?
आपने देखा होगा कि हमारे आस पास कई लोग ऐसे होते हैं जो अपनी सारी जिंदगी परेशान रहने में गुजर देते हैं ।
उन्हें बस एक चीज पता होती है।
की एक सफल जीवन जीना बहुत मुश्किल काम है।
क्या वाकई में जीवन जीना कठिन काम है ?
नही न।
पर वो ऐसा सोंचते है क्योंकि ये उनकी सोंच  है।
वो सोंच ही नही पाते कि ऐसे भी जीवन जिया जा सकता है।
और भी तरीके हैं जिससे कि आप खुश रह  सकते है।
सिर्फ पैसा या दूसरी सुविधाएं नही ।
अपने आप में भी खुश रहा जा सकता है ।
जल्दबाजी में फैसले लेने से कोई भी काम और भी बिगड़ सकता है , लेकिन हम  जल्दी से जल्दी
सारे रिजल्ट देखना चाहते है।
कुछ भी सोंचने और समझने का टाइम हमारे पास नही होता।
हमे चाहिए कि जब भी ऐसी कोई सिचुएशन हमारे सामने आए तो सबसे पहले अपने माइंड को अपने कन्ट्रोल में रक्खे। क्योंकि हमारे माइंड में एक ही टाइम पे इतना सब कुछ चल रहा होता है। कि उसे कन्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है खास कर उनके लिए जो किसी भी सिचुएशन को बिना देखे सुने उसपे डिसीजन ले लेते हैं।
अब ये तो सभी जानते है कि केवल एक मिनट के अंदर हमारे माइंड में लगभग 70 हज़ार विचार आते है ।
हम सबको कन्ट्रोल नही कर सकते लेकिन कम से कम जब हम किसी सिचुएशन को फेस कर रहे होते है उस टाइम जो थॉट्स हमारे माइंड में आते है उनपे तो हम काम कर ही सकते है।
और ये  बहुत मुश्किल नही होता ।
हमने सब कुछ अपने माइंड में सेट कर रखा होता है। सारे के सारे एल्युजन्स हमारे खुद के बनाये हुए होते है
बाहर कुछ भी  नही है सब अंदर है
हम खुश भी अंदर से होते है उदास भी अंदर से होते है सब कुछ अंदर से होता है।
बाहर तो बस दिखावा है।

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