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समस्या नहीं तो सफलता भी नहीं।

आपने टीवी पर शेर को हिरण का शिकार करते हुए देखा होगा ।
आपने देखा होगा कि कैसे शेर हिरणों के झुंड पर अटैक करता है और किसी एक को मार के अपनी भूख को शांत कर लेता है।
अब इसे थोड़ा सा चेंज कर देते है
सोंचिये क्या हो अगर हिरणों का झुंड भागने की बजाय सारा का सारा शेर की ही तरफ हमला कर दे।
शेर कितनो को मरेगा ।
एक को
दो को
तीन को
चार को
पांच को
छह को
बस इससे ज्यादा शेर का स्टैमिना नही होता कि वो एक ही टाइम में  इतने सारे हिरणों को मार सके ।
और उसे अपनी जान बचा के भागना पड़ सकता है ।
बट सारे हिरण भागते क्यों हैं ।
आपने कभी सोंचा ।
बिकॉज उनमें से हर एक हिरण शेर को देखते ही ये सोंचने लगता है यार मैं तो अकेला हूँ।
अगर नही भागा तो ये मुझे मार के खा जाएगा।
एंड जैसे ही वो सब ये सोंचके भागने लगते है शेर का काम और आसान हो जाता है बस दौड़ के उनकी गर्दन दबोचनी होती है ना लड़ना पड़ता है और ना ही कोई कॉम्पटीशन। बस मारा और खा गया। कहानी खत्म।
अब जब आप इसे अपनी लाइफ से कोरिलेट करेंगे तो शायद ऊपर वाली बकवास समझ आये।
हिरण की तरह हमे भी हर वो मुसीबत , हर वो प्रॉब्लम, हर वो बुरी घटना शेर ही लगती है जो हमारी लाइफ में अभी है।
या आने वाली है।।
हम उसे देखते ही सबसे पहले ये सोंचते है कि कैसे इससे भागूं, बचूं, इससे दूर जाऊं ताकि इससे बचा जा सके ।
बट ये हमारी गलत फहमी होती है।
शेर कल फिर आएगा ।
और जब तक उससे भागोगे मरने का खतरा तब तक बना रहेगा।
सो प्रॉब्लम्स भी ऐसी हैं कभी खत्म नही हो सकती आपके मरने तक।
बट हम क्या करते है।
उसे फेस करने के बजाय पहले ही हार मान लेते हैं ।
हम अपने आप को पहले ही मरा हुआ मान लेते है।
अगर आप किसी टाइम किसी प्रॉब्लम को फेस करने की बजाय  अपने रास्ते हो लिए।
ये सोंचके की आप उससे बच गए।
तो आपने अपना पैर कुल्हाड़ी पे रख दिया
अब मैं आपसे कहता हूं।।
कि जरा एक बार फिर से उस मोमेंट में जाओ और अपने आप को वहां फिर से रक्खो और फिर अपने आप से ये सवाल करो कि क्या मुझमे इतनी भी ताकत नही थी।
इतनी भी हिम्मत नही थी।
इतना भी भरोसा नही था अपने ऊपर।
और अगर नही था तो आपको ये कहने का कोई हक नही है कि आप आज सक्सेसफुल इंसान नही है।
की आप  वो नही है जो आप बनना चाहते थे।
बिकॉज इंसान की लाइफ में अपॉरचुनिटी प्रॉब्लम्स के जरिये ही आती है।
अगर प्रॉब्लम्स नही तो कोई नई ऑपर्चुनिटी नही।
एंड बिना ऑपर्चुनिटी के सक्सेस नही।
ये सब कुछ स्टेप बी स्टेप होता है।
बहुत से लोग हैं जो एक लिमिट तक अपनी प्रॉब्लम्स से लड़ने के बाद आगे बढ़ना बन्द कर देते  है ।
खुद के लिए कुछ करना बंद कर देते हैं।
खुद को पुश करना बंद कर देते है
अपनी फिटनेस खराब कर लेते हैं।
अपने आप को बिल्कुल उस मोमेंट में बंद कर देते हैं।
एंड बाहर से ये दिखाने की कोशिश करते हैं कि हाँ में ठीक हूँ।
बट वो अपनी उस सिचुएशन्स को बदलने के लिए कुछ भी नही करना चाहते।
एंड बहुत से लोग अपने सपने के लिए काम करना ही बंद कर देते हैं।
क्यों?
केवल डर की वजह से
एंड वो डर होता है उनका फेलियर
बिकॉज उन्हें  लगने लगता है कि कहीं वे फेल न हो जाएं
उन्हें रिस्क नही लेने की आदत बनने लगती है और बदलाव उनसे दूर हो जाता है।
एंड लास्ट मूमेंट पे आकर वो गिवप कर देते हैं।
इसलिए ये बहुत इम्पोर्टेन्ट है।
कि आपको ये भरोसा होना चाहिए कि आप ही वो इंसान हैं।
जो अपनी लाइफ को बदल सकता है।
पूरी तरह से ।
जो हो चुका है और जो होने वाला है।
उसके अलावा आज जो आप है जिस भी सिचुएशन् में।
आप बदल सकते हैं
आपको ये मालूम है की लाइफ एक सर्कल है।
आने वाले टाइम में लाइफ में। चेंजेस आएंगे आपको उसके लिए तैयार रहना है।
और अगर आज के दस साल बाद भी आप वैसे ही होंगे जैसे आज हैं तो वो केवल इसलिए क्योंकि आप ही ने कोशिश नही की

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