Skip to main content

हमारी सोंच ।

आप की सोंच ये तय करती है कि आप इंसान कैसे हैं।
और आपके काम ये तय करते हैं कि आपकी सोंच कैसी है।
आप चाहे जहां भी रह रहे हो,
आपको पता होगा  की कुछ लोग ऐसे होते हैं कि वो चाहे जिस भी सोसाइटी में रह रहे हों।
वो चाहे अमीर हो या गरीब, वो महंगी कार से चलते हो , ब्रांडेड कपड़े पहनते हो, किसी अच्छी पोजीशन पे जॉब कर रहे हों या बिज़नेस।
या फिर वो लोग जिनके पास इन सब में से कुछ भी न हो।
मै आपको बताना चाहता हूं कि उन सब की सोंच बिल्कुल एक जैसी होती है क्योंकि उनके हर सेंटेंस में गाली होती है।
वो चाहे जो भी बात कर रहे हों,जिससे भी बात कर रहे हों उनके हर सेंटेंस में महिलाओं को लेकर गाली होती है
और ये हमारे यहाँ आम बात है
करप्शन के मामले में हम  पूरे एशिया में नंबर 1 पर है। हमारे यहां स्कूल्स में, हॉस्पिटल्स में, गवर्मेंट आफिस में, कोर्ट में, पुलिस स्टेशन्स, में यहां तक कि अगर आपको अपना  आई डी कार्ड भी बनवाना है तो भी हमारे देश में रिश्वत ली जाती है।
और ये हमारे यहां आम बात है
मैंने देखा है हमारे यहां लोग घंटों ट्रैफिक में फसने को तैयार होते हैं बट 5 मिनट।
केवल 5 मिनट ट्रैफिक रूल्स फॉलो करने में उन्हें अपनी बेज्जती महसूस होती है। और अगर कोई बंदा रूल्स फ़ॉलो कर रहा है तो उसे ही पागल बताया जाता है।बिकॉज़ हम स्मार्ट ज्यादा है।
और अगर हमने रूल्स फॉलो कर लिए तो हम स्मार्ट लोगों की कैटेगिरी से बाहर हो जाएंगे ।
और ये हमारे यहां आम बात है ।
हमारे देश में अनाथ और गरीब बच्चों को पकड़कर उन्हें शारीरिक रूप से अपाहिज बना कर उनसे भीख मंगवाई जाती है ।और हम बड़े शौख से उन्हें भीख देते हैं।
आपको हर चौराहे पर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च में,या किसी भी मेले में ,मतलब हर जगह आपको  भिखारी देखने को मिल जाएंगे।  
जिसमे कुछ बच्चे जरूर होंगे ।
और ये भी हमारे यहां आम बात है।
हमारी नजर में ये सब इतनी कॉमन प्रॉब्लम्स है कि इन्हें फेस करते करते भी हम इन्हें इग्नोर करते रहते हैं।
बट जब बात आती है इन सारी प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने की।
उनकी  तह तक जाके उन्हें ठीक करने की तब हम उसे ठीक नही किनारे कर देते हैं ।
और जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है, जब हम उस प्रॉब्लम को फेस करते है जिसे हमसे पहले कोई और झेल रहा था और हमने उसे इग्नोर किया था उसे ठीक करने की बजाय ।
जबकि हम कर सकते थे ।
तब हमें बहुत बुरा लगता है और हम दूसरों पे ब्लेम करने लगते है ।
हम लोगों को ब्लेम करते है,गवर्मेंट को ब्लेम करते हैं यहां तक कि हम भगवान को भी नही छोड़ते ।
बट क्या सारी रिस्पांसबिल्टी दूसरों की है।
या उन लोगों की जिन्हें आप जानते है ।
या फिर  गवर्मेंट की?
देखिये लोगों का जो काम है वो अपनी फॉर्मेलिटी पूरी करते है
और गवर्मेंट का जो काम है वो तो अपना काम कर ही रही है कम ज्यादा अच्छा बुरा जैसा भी है वो कर कर रही है।
बट सवाल यहां ये नही है सवाल ये है कि हम क्या कर रहे हैं ।
यार हमारी क्या रिस्पांसबिल्टी है?
क्या हम चीजों को ठीक करने के लिए कुछ नही कर सकते?
लेकिन आप कहेंगे नही ।।ये मेरा काम थोड़े न है ।जिसका काम है वो करे।
मैं क्यों करूँ।
और यही चीज हमारी सोंच को परिभाषित करती है।
हमारी सोंच इस हद तक घटिया होती चली जा रही है कि अपने फायदे के लिए हम जो भी घटिया से घटिया काम कर सकते हैं वो करते हैं 
और इस बात से हमे कोई परवाह नही है कि हमारे समाज पर इसका क्या फर्क पड़ेगा । या फिर वो लोग जिन्हें हम जानते हैं उन पर इसका क्या असर होगा।
और तो और हमने अपनी सोंच के दायरे को इतना छोटा कर लिया है कि कुछ भी अच्छा हमारे दिमाग में घुस ही नही सकता ।
मैन देखा है कुछ लोग अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं ।
फिर चाहे वो चोरी हो,मर्डर हो, रेप हो,  करप्शन फैलाना हो या,चाहे जो भी हो।
उन्हें  इससे कोई फर्क नही पड़ता की क्या और कितना ज्यादा नुकसान हो रहा है।
लेकिन नही उनका फायदा हो रहा है, वो आगे बढ़ रहे हैं वो ज्यादा पैसा कमा रहे हैं और क्योंकि उनकी मानसिकता के हिसाब से उनके लिए ये जरूरी है।
सबसे जरूरी।
पैसा कमाना और अपना फायदा देखना कुछ लोगों के लिए इतना ज्यादा जरूरी हो गया है कि वो इसके लिए कुछ भी घटिया से घटिया काम कर सकते हैं।
और उन्हें कोई फर्क नही पड़ता।
हम दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते  हैं क्योकि
ये हमारी सोंच है।
हम दूसरों से जलते हैं क्योकि
ये हमारी सोंच है ।
हमे दूसरों के काम बनाने में नही बिगाड़ने में मजा आता है क्योंकि ये हमारी सोंच है।
एक बार सोंच के देखिये
130 करोड़ से भी ज्यादा की आबादी जिसमें से 65% से भी ज्यादा यंगस्टर्स ,74% Literacy. दुनिया का चौथी ऐसी कन्ट्री जो मार्स तक पहुंच गई ।
दुनिया में सबसे ज्यादा खेती करने लायक जमीन और 10 महान नदियां ।
फिर भी हमारे देश में बच्चे कुपोषण का शिकार होते है उन्हें भरपेट खाना नही मिलता और हमारे किसान आत्महत्या कर रहे है।
एक आदमी स्वच्छ भारत की मुहीम चला रहा है और वहीं कुछ लोग अपने मुंह में भरा हुआ पान मसाला सार्वजनिक जगहों पे  थूक कर अपने आपमें गर्व महसूस करते हैं ।
हमे खुद ही सोंचना होगा कि हम क्या कर रहे है अगर हम बदलाव देखना  चाहते हैं तो शुरुआत हमे खुद से करनी होगी।
अपने नजरिये को बदलना होगा अपनी सोंच को बदलना होगा ।
आप दुनिया नही बदल सकते जब तक आप खुद को नही बदलेंगे।
अगर हमारे सामने कुछ हो रहा है और वो गलत है तो हमे उसे रोकना होगा।
कुछ बहुत बड़ा करने की जरूरत नही है बस एक छोटा सा चेंज किसी की भी लाइफ को बदल सकता है।
हमे अपनी सोंच को बदलना होगा।
मैं बड़ी बड़ी बातें नही करना चाहता लेकिन अगर मेरे सामने ये सब कुछ होता है तो मैं चुप भी नही बैठ सकता।
क्योंकि बड़ी बड़ी बातें तो सब कर लेते है। लेकिन बड़े बड़े काम करना सबके बस की बात नही है।

Comments

Popular posts from this blog

जरूरी क्या है अच्छा बनना या अच्छा दिखना?

आपके मरने के बाद कोई भी ये याद नहीं रक्खेगा कि ये कपड़े बहुत ब्रांडेड पहनता था। इसके पास फ़ोन बहुत अच्छा था। इसकी कार बहुत महंगी थी। या इसके पास बहुत बड़ा बंगला था । इन सब बातों को कोई भी याद नही रक्खेगा। सिवाय इसके की आपका व्यक्तित्व कैसा था। ये बात थोड़ी अटपटी जरूर लगती है लेकिन ये सच है। किसी को कोई मतलब नही है कि आप क्या पहनते है? किससे चलते हैं क्या खाते हैं क्या पीते हैं कितने महंगे घर में रहते हैं किसी को कोई फर्क नही पड़ता। लोग आपको केवल आपकी पर्सनैलिटी से याद रखते हैं आपके बिहेवियर से याद रखते हैं,आपकी पॉजिटिविटी से याद रखते हैं आपकी सिनसीअर्टी से याद रखते हैं अपने काम के लिए जो आपका डेडिकेशन है उसके लिए याद रखते हैं। और इसका आपके चहेते ब्रैंड से कोई लेना देना नही है। लेकिन हम सब कहीं ना कहीं दूसरों का ध्यान अपनी ओर करना चाहते हैं। इस दुनिया का हर इंसान, यही चाहता है कि सबका ध्यान मेरी तरफ हो। हर कोई कहीं न कहीं मुझसे अट्रैक्ट हो और हम इसी चक्कर में एक से एक महँगा सामान खरीदते हैं, ज्यादा से ज्यादा पैसा खर्च करते हैं अच्छा दिखने के लिए। अच्छा बनने के लिए नही। क्यों...

क्या सब कुछ दिखावा है?

अब सोंचने का समय नही है। क्योंकि ये कई मायनों में साबित हो चुका है कि हमारी हर परेशानी की वजह हम खुद हैं । और इसमें कोई दो राय नही है कि हमारी हर समस्या को हमने खुद पैदा किया है । ये कही बाहर से नही हो रहा। कोई और आकर आपको परेशानी में नही डाल रहा आप खुद ही परेशान हैं वो भी अपने अंदर की मानसिकता के कारण। बस हम समझ नही पा रहे है। जीवन के इतने सारे पहलुओं में ये भी एक पहलू है । जिसे समझना बहुत जरूरी है क्योंकि आप की सारी परेशानिया आप से है। या यूं कह लें आप खुद है। क्योंकि इस पूरी दुनिया में सिवाय इंसान के और कोई ऐसा जीव नही है जो सामाजिक रूप से रहता हो। कोई नही है। सिवाय हमारे । क्योंकि हम अलग है । हम सोंच सकते है,समझ सकते हैं,बोल सकते हैं। हम अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता का रूप दे सकते है। और उसी वास्तविकता में जीते हैं लेकिन अगर इसकी ऊपरी परत को हटाकर देखा जाए तो आपको ये समझ आएगा कि आखिरमें सब कुछ कल्पना है। हमने अपनी लाइफ में जो भी चीज वास्विकता में देखी है वो पहले कल्पना थी। पहले हमने उसे अपनी कल्पना में देखा। फिर वो अस्तित्व में आई। हर चीज। एक सुई से लेकर सैटेलाइट...

समस्या नहीं तो सफलता भी नहीं।

आपने टीवी पर शेर को हिरण का शिकार करते हुए देखा होगा । आपने देखा होगा कि कैसे शेर हिरणों के झुंड पर अटैक करता है और किसी एक को मार के अपनी भूख को शांत कर लेता है। अब इसे थोड़ा सा चेंज कर देते है सोंचिये क्या हो अगर हिरणों का झुंड भागने की बजाय सारा का सारा शेर की ही तरफ हमला कर दे। शेर कितनो को मरेगा । एक को दो को तीन को चार को पांच को छह को बस इससे ज्यादा शेर का स्टैमिना नही होता कि वो एक ही टाइम में  इतने सारे हिरणों को मार सके । और उसे अपनी जान बचा के भागना पड़ सकता है । बट सारे हिरण भागते क्यों हैं । आपने कभी सोंचा । बिकॉज उनमें से हर एक हिरण शेर को देखते ही ये सोंचने लगता है यार मैं तो अकेला हूँ। अगर नही भागा तो ये मुझे मार के खा जाएगा। एंड जैसे ही वो सब ये सोंचके भागने लगते है शेर का काम और आसान हो जाता है बस दौड़ के उनकी गर्दन दबोचनी होती है ना लड़ना पड़ता है और ना ही कोई कॉम्पटीशन। बस मारा और खा गया। कहानी खत्म। अब जब आप इसे अपनी लाइफ से कोरिलेट करेंगे तो शायद ऊपर वाली बकवास समझ आये। हिरण की तरह हमे भी हर वो मुसीबत , हर वो प्रॉब्लम, हर वो बुरी घटना शेर ही लग...